Saturday, December 12, 2015

काशी में आपका स्वागत है मोदी-शिंजो

धर्म-अध्यात्म, कला-संस्कृति की परंपराप्रिय पौराणिक नगरी काशी में आपका हार्दिक स्वागत है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे। निश्चित रूप से आप दोनों का आ
मोदी-शिंजो के स्वागत में लगाए गए होर्डिंग्स। 
गमन संबंधों के स्वर्णिम इतिहास को सुनहरा भविष्य देगा। जहां मानक शिक्षा का आसमान होगा, आधारभूत संरचनाओं के विकास की पहचान होगी और होगा बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता।
आपके आगमन की सूचना से ही कितनी बदल गई काशी। चमचमाती गलियां, रोशन रास्ते, चमकते-दमकते घाट-चौराहे, यहां का कण-कण सब आपके स्वागत को पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। अभी 16 नवंबर की बात है। काशी और क्योटो के बीच कूड़ा प्रबंधन को लेकर होने वाला एमओयू इसलिए टल गया था कि तैयारी पूरी नहीं थी। इसके टलने के साथ ही पिछले डेढ़ वर्ष से काशी को क्योटो के समान बनाने की कवायद पर भी पानी फिरता दिखने लगा। रोज-रोज की घोषणाओं से काशीवासी भी उकता गए कि पता नहीं कुछ होगा भी या नहीं। यह भी एक राजनीतिक घोषणा ही समझ में आने लगी। उधर, लालू भी लालटेन लेकर निकलने का दावा कर रहे थे। लेकिन, आप दोनों के आगमन ने यह साबित किया कि मोदी का काशी से किया वादा केवल वादा नहीं है। बीच-बीच में होने वाले दौरों में उनके द्वारा की गई भावनात्मक टिप्पणियां महत्व रखती हैं। उनके लिए काशी के मायने हैं, यह साबित हो गया। जापानी टीम लौटी तो मोदी शिंजो को लेकर ही चले आए और शिंजो के कदम पडऩे की जानकारी होते ही पल-पल रूप बदलने लगी काशी।
मेहमान शिंजो, आप काशी की धरती पर पहली बार आ रहे हैं। जब आप यहां बाबतपुर एयरपोर्ट पर होंगे तो आपके स्वागत को तैयार होंगे प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। स्वर लहरियां आपको यहां की संस्कृति से रूबरू कराएंगी। आपके काफिले को नदेसर कोठी के रास्ते कदम-कदम पर स्वागत करेगी बच्चों की मुस्कान। दशाश्वमेध घाट पर जब आप देख रहे होंगे विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती तो ठीक उसी वक्त वहां गुंजायमान भक्ति के सरस स्वर करेंगे दो महान संस्कृतियों का संगम।
प्रधानमंत्री शिंजो, हमें मालूम है कि बौद्ध धर्म की हमारी संस्कृति के पूरे सम्मान का नाम है जापान तो स्वतंत्रता संग्र्राम में आजाद ङ्क्षहद फौज को शाही सेना की सहायता की पहचान भी है जापान। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर किसी द्विपक्षीय विदेश यात्रा के लिए सर्वप्रथम जापान को चुनकर रिश्ते की स्वर्णिम गाथा पर मुहर लगाई है। मंदिरों की यह नगरी जापान के महत्वपूर्ण शहर क्योटो से धर्म का सीधा नाता जोड़ती है। संस्कृतियों के इस संगम का अद्भुत दृश्य देखने को काशी बेकरार है, सुरक्षा की मुकम्मल तैयारियों के साथ तैयार है। आइए, काशी में आप दोनों प्रधानमंत्री का स्वागत है...।

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